Wednesday, September 16, 2026
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बदरीनाथ तथा केदारनाथ धाम सहित मंदिरों में प्रवेश का प्रश्न नागरिक अधिकार का नहीं बल्कि धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा है: हेमंत द्विवेदी

* सिख और जैन धर्मावलंबियों के मंदिर प्रवेश पर संविधान का हवाला

• श्री केदार सभा, श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत सहित सनातन धर्मावलंबियों की मांग पर लिया गया फैसला

बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा है कि केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सनातन परंपरा के सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र हैं। यहाँ प्रवेश का प्रश्न नागरिक अधिकार का नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और परंपरा का है अत: इन धामों में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाना शास्त्र सम्मत तथा संविधान के प्रावधानों अनुच्छेद 25 तथा 26 के अनुरूप है।

 

उल्लेखनीय है कि श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने हक हकूकधारियों, श्री केदार सभा, सहित श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत एवं धर्मावलंबियों की मांग पर आगामी बोर्ड बैठक में श्री बदरीनाथ तथा श्री केदारनाथ धाम में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध संबंधित प्रस्ताव लाने की घोषणा की है जिसका श्री केदार सभा सहित श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत तथा सभी सनातन धर्मावलंबियों ने स्वागत किया है वही श्री गंगोत्री तथा श्री यमुनोत्री मंदिर समिति ने मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध संबंधित प्रस्ताव पारित कर दिया है।

 

बीकेटीसी अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 26 हर धार्मिक संप्रदाय को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार देता है। यह कि संविधान हमें यह अधिकार देता है कि हम अपनी आस्था और परंपरा की रक्षा करें। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक तर्क है केदारनाथ और बद्रीनाथ आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित वैदिक परंपरा के केंद्र हैं।यहाँ की पूजा-पद्धति शुद्ध वैदिक दीक्षा और सन्यास पर आधारित है। ये धाम मोक्ष परंपरा से जुड़े है तथा यहां विदेशी या गैर-आस्थावान प्रवेश का कभी प्रचलन नहीं रहा।पुरोहित व्यवस्था दीक्षा-संप्रदाय पर आधारित रही है। गैर हिंदुओं का मंदिरों में प्रवेश पहले से प्रतिबंधित रहा है यह कोई नया नियम नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा का औपचारिक पालन है।उन्होंने कहा कि यह किसी धर्म के विरोध का विषय नहीं है।यह प्रश्न केवल यह है कि क्या व्यक्ति इस परंपरा में आस्था रखता है या नहीं।कहा कि मस्जिद में नमाज़ की शर्तें है चर्च में संस्कार की सीमाएँ निर्धारित है हर धर्म को अपनी पवित्रता और अनुशासन तय करने का अधिकार है।

 

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने बार-बार कहा है कि मंदिर में प्रवेश कोई सामान्य नागरिक अधिकार नहीं, बल्कि धार्मिक आचरण का विषय है द्विवेदी ने कहा कि पर्यटन और तीर्थ दोनोंअलग-अलग है केदारनाथ-बद्रीनाथ पर्यटन स्थल नहीं, तीर्थ हैं पर्यटन का उद्देश्य मनोरंजन होता है, धर्मशास्त्रों के अनुसार तीर्थ का उद्देश्य आत्मिक साधना मानी गयी है। बीकेटीसी ने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन के लिए हजारों स्थल खुले हैं अतः धामों की पहचान बदलना आस्था के साथ अन्याय होगा।जो व्यक्ति सनातन परंपरा में आस्था रखता है, वह अपनी आस्था के अनुसार आगे बढ़ सकता है।लेकिन धाम की मूल धार्मिक पहचान से समझौता नहीं किया जा सकता

 

केदारनाथ और बदरीनाथ धाम कोई पिकनिक स्पॉट नहीं, बल्कि सनातन परंपरा के सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र हैं।संविधान का अनुच्छेद 25 में स्पष्ट है कि सिक्ख , जैन, बौद्ध, ईसाई सनातन परंपरा के अंग है। अनुच्छेद 26 हमें यह अधिकार देता है कि हम अपनी धार्मिक परंपराओं और पूजा-पद्धति की रक्षा करें।यह निर्णय किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था, अनुशासन और शुद्धता के संरक्षण के लिए है।

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