स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में घोटाले के कांग्रेस के आरोपों की पुष्टि सीएजी रिपोर्ट में
स्मार्ट सिटी कार्यों की सीबीआई की जांच हो – सूर्यकांत धस्माना
देहरादून: स्मार्ट सिटी मिशन के तहत २०१७ में तीसरे फेस में देहरादून को स्मार्ट सिटी बनाने की योजना केंद्र सरकार ने स्वीकृत की थी जिसे वर्ष २०२३ तक पूरा किया जाना था किंतु समय पर कार्य ना होने से इसे समय विस्तार दिया जाता रहा और २०२५ में आधे अधूरे निम्न स्तरीय कार्य के बावजूद इसके पूर्ण होने की घोषणा तत्कालीन सीईओ द्वारा कर दी गई। लगभग छह सात वर्षों तक पूरे देहरादून महानगर को खोद डाला गया और लगभग बाईस तरह से शहर को स्मार्ट बनाने की लंबी चौड़ी जुमले बाजी की गई किंतु सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च करने के बाद जब इस योजना के पूर्ण होने की घोषणा की गई तो स्मार्ट कि जगह शहर और बदतर हाल में हो गया और तभी हमने इस पूरी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के कार्यों की गुणवत्ता और घोटाले की बात कही थी जिस पर अब सीएजी रिपोर्ट ने भी मोहर लगा दी है यह बात आज एआईसीसी सदस्य व उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने पत्रकारों से बातचीत में कही।
उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत कार्य आवंटन में अनियमितताएं, कार्यों की गुणवत्ता व कार्यों को आधा अधूरा छोड़ना जैसे मामले प्रकाश में आने के बावजूद कोई जांच व कोई कार्यवाही कार्यदाई संस्थाओं के खिलाफ नहीं हुई क्योंकि इस घोटाले को पूरी तरह से राज्य सरकार के संरक्षण में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट के अध्यक्ष की देख रख में किया।
धस्माना ने कहा कि इस योजना के तहत भूमिगत विद्युतीकरण के कार्य, ट्रैफिक सिस्टम, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, स्कूलों व महाविद्यालयों में सीसीटीवी कैमरे व वाईफाई , स्मार्ट बोर्ड, स्मार्ट शौचालय आदि कार्यों पर सैकड़ों करोड़ खर्च किए गए लेकिन कार्य या तो हुए नहीं या केवल दिखावे के लिए निम्न स्तर के कार्य हुए। श्री धस्माना ने कहा कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के समय अनेक बार कांग्रेस द्वारा यह मुद्दे उठाए गए किंतु सरकार गूंगी बहरी बनी रही और घोटाले होते रहे। श्री धस्माना ने कहा कि अगर इस पूरे प्रोजेक्ट की उच्च स्तरीय जांच सीबीआई से करवाई जाए तो भाजपा सरकार का यह सबसे बड़ा घोटाला साबित होगा।







