वन विभाग के अनुसार, बीते नौ मार्च को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से अनुमति मिलने के बाद ‘हिमालयन काला भालू’ (रीख) के नवीन बाड़े को सभी मानकों के अनुरूप विकसित किया गया, जिसका उद्घाटन प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने देहरादून जू स्थित मालसी परिसर में कर उसे पर्यटकों के अवलोकनार्थ समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने तथा प्रकृति एवं मानवता के मध्य संतुलित समन्वय स्थापित करने हेतु निरंतर कार्य कर रही है। यह बाड़ा जू के लगभग 20 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले सफारी जोन का हिस्सा है, जिससे पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को देखने का अनुभव मिलेगा।

कार्यक्रम के दौरान वन मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष जू में बाघ को प्रदर्शित किए जाने के बाद यहां करीब 1.50 लाख पर्यटक पहुंचे और लगभग 1.50 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि भालू बाड़े के खुलने से पर्यटकों की संख्या में और इजाफा होगा और देहरादून पर्यटन को नया आयाम मिलेगा। प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु ने कहा कि वर्तमान में इस बाड़े में एक नर हिमालयी काला भालू रखा गया है, जिसे 29 अप्रैल 2025 को चकराता वन प्रभाग की कनासर रेंज से रेस्क्यू किया गया था। बाद में एक मई 2025 को मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की स्वीकृति के बाद उसे देहरादून जू लाया गया। लगभग दो वर्ष उम्र का यह भालू अब पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनेगा। उन्होंने बताया कि भालू बाड़े का खुलना वन्यजीव संरक्षण और जन-जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र ने बताया कि जू के सफारी क्षेत्र को और समृद्ध बनाने के लिए भविष्य में सफेद टाइगर और स्ट्राइप्ड हायना लाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके लिए विभाग लगातार प्रयासरत है।
वन मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैव-विविधता एवं वन्यजीव संपदा की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध राज्य है तथा वन्यजीव संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि ‘फॉरेस्ट कंजर्वेशन’ के अंतर्गत वन्यजीव विनिमय कार्यक्रम को भविष्य में और अधिक गति प्रदान की जाएगी, जिससे वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार से परिवहन संबंधी आवश्यक अनुमति प्राप्त होने के उपरांत राज्य में पर्याप्त संख्या में उपलब्ध वन्यजीवों को अन्य राज्यों की मांग एवं वहां की पारिस्थितिक आवश्यकताओं के अनुरूप संबंधित नेशनल पार्कों एवं चिड़ियाघरों में स्थानांतरित किया जाएगा। इस पहल से न केवल वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में जैव-विविधता के संतुलन को बनाए रखने में भी सहायता प्राप्त होगी। उनियाल ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीवों के संरक्षण, संवर्धन एवं सुरक्षित आवास सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। उन्होंने देहरादून जू प्रशासन एवं वन विभाग की टीम को इस नवीन बाड़े के निर्माण एवं व्यवस्थाओं के लिए बधाई देते हुए कहा कि इससे पर्यटकों एवं वन्यजीव प्रेमियों को हिमालयी वन्यजीवों के बारे में बेहतर जानकारी प्राप्त होगी।

आपको बताते चले कि देहरादून चिड़ियाघर पहले से ही बाघ, गुलदार, हिरण की विभिन्न प्रजातियों, पक्षियों और सरीसृपों के लिए जाना जाता है। अब हिमालयी काला भालू के जुड़ने से इसकी लोकप्रियता और बढ़ने की उम्मीद है। मालसी स्थित देहरादून चिड़ियाघर सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक पर्यटकों के लिए खुलता है। सोमवार को जू में अवकाश रहता है। यहां वयस्कों के लिए 100 से 120 रुपये तक टिकट शुल्क है, जिससे पूरा चिड़ियाघर घूमा जा सकता है। इस दौरान अपर प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) विवेक पांडे, मुख्य वन संरक्षक पीके पात्रो, वन संरक्षक शिवालिक वृत्त राजीव धीमान, निदेशक राजाजी टाइगर रिजर्व, देहरादून जू के निदेशक नीरज कुमार, प्रभागीय वनाधिकारी मसूरी अमित कंवर, प्रभागीय वनाधिकारी कालसी मयंक गर्ग सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।








