- उत्तराखंड में इसी साल विधानसभा चुनाव? चर्चाओं पर CM पुष्कर धामी का भी आ गया जवाब
- उन्होंने कहा कि हमें किसी भी स्तर से यह नहीं कहा गया है कि समय से पहले चुनाव हो रहे हैं।
दरअसल, हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई थी कि जनगणना और हरिद्वार कुंभ भी फरवरी 2027 में प्रस्तावित है। ऐसे में इतने बिजी शेड्यूल के चलते उत्तराखंड में समय से पहले विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। उत्तराखंड में इसी साल नवंबर या दिसंबर महीने में चुनाव की चर्चाएं सामने आईं थी। आपदा प्रबंधन मॉकड्रिल के दौरान गुरुवार को आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में समीक्षा के लिए पहुंचे धामी ने मीडिया की ओर से समय से पहले चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर स्थिति स्पष्ट की। हाल के दिनों में सियासी हलकों में इस चर्चा ने जोर पकड़ा कि अगले साल की शुरुआत में हरिद्वार कुंभ और जनगणना की वजह से उत्तराखंड के साथ ही यूपी में चुनाव समय से पहले हो सकते हैं। इस बीच भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के लगातार उत्तराखंड दौरे के बीच पार्टी स्तर पर भी चुनाव तैयारियों को देखते हुए समय से पहले चुनाव की चर्चाओं ने जोर पकड़ा। वहीं, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी पूरी तरह चुनावी तैयारियों में जुट गई है।
इस सबके बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमको किसी भी स्तर पर यह नहीं कहा गया है कि उत्तराखंड में चुनाव समय से पहले हो रहे हैं। अभी इसको लेकर कोई औपचारिक या अधिकारिक सूचना नहीं है। ऐसी कोई तैयारी भी नहीं है। यह चुनाव आयोग को तय करना है कि चुनाव कब होंगे। देहरादून। राजपुर रोड और मसूरी मार्ग को भीषण जाम से मुक्ति दिलाने के लिए केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना’ एक बड़ा सहारा बन सकती है। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रदेश महामंत्री अशोक चौधरी का सुझाव है कि केंद्र सरकार से इस योजना के तहत उत्तराखंड को जल्द ही 100 नई इलेक्ट्रिक बसें मिलने वाली हैं। यदि राजपुर रोड पर जाम का बोझ कम करना है, तो इनमें से 50 बसों का उपयोग विशेष रूप से देहरादून-मसूरी रूट के लिए किया जाना चाहिए।
इसके लिए जिला प्रशासन और रोडवेज को मिलकर एक ठोस पहल करनी होगी। उन्होंने रणनीति साझा करते हुए कहा कि मुख्य पर्यटन सीजन के दौरान देहरादून आईएसबीटी और रेलवे स्टेशन से हर पांच मिनट में एक इलेक्ट्रिक बस मसूरी के लिए रवाना की जानी चाहिए। इस तरह सुबह से लेकर रात तक 14 घंटों में करीब 150 ट्रिप आसानी से संचालित किए जा सकते हैं। रोडवेज प्रशासन इस व्यवस्था को आसानी से संभाल सकता है।








