देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राजमार्ग पर टौंस नदी के ऊपर बना नया पुल शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद सवालों के घेरे में आ गया है. करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह पुल पहली बारिश में ही धंस गया, जिसके बाद इसकी निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) ने पुल का निरीक्षण शुरू कर दिया है और कारणों की जांच कर रही है. नंदा की चौकी स्थित पुराना मुख्य पुल 15 सितंबर 2025 की रात क्षतिग्रस्त हो गया था. पुल की एबटमेंट वॉल और एक स्लैब टूटने के बाद यातायात बनाए रखने के लिए ह्यूम पाइप डालकर अस्थायी पुलिया बनाई गई थी. यह पुलिया करीब 10 महीने तक लोगों के आवागमन का सहारा बनी रही.
16 करोड़ की लागत से बनाया गया पुल
इसके बाद मार्च 2026 में करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से नए मुख्य पुल का निर्माण शुरू हुआ. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद 11 जुलाई की रात तेज बहाव में अस्थायी पुलिया भी धंस गई. इसके अगले ही दिन, यानी 12 जुलाई से वाहनों का आवागमन नए पुल पर शुरू करा दिया गया.
पहली ही बारिश नहीं झेल पाया पुल
नई व्यवस्था ज्यादा दिन नहीं चल सकी. पहली बारिश के दौरान पुल के एक हिस्से में भारी धंसाव सामने आया, जिससे सुरक्षा के मद्देनजर इस पर यातायात प्रभावित हो गया. पुल पर गड्ढे बनने की सूचना मिलते ही संबंधित विभाग और प्रशासन हरकत में आया। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुल पर सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है. 16 करोड़ की लागत से बना पुल 16 दिनों में ही क्षतिग्रस्त हो गया. इस घटना के बाद पुल का निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था की कार्यशैली और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.








