पहले खराब सड़कों के चलते हमारा सफर लंबा और थकान भरा रहता था. लेकिन अब हर तरफ एक्सप्रेसवे बनने से लंबी यात्रा करना आसान हो गया है. लेकिन एक्सप्रेसवे पर पिछले कुछ समय से दुर्घटनाओं की खबर भी बढ़ती जा रही है. बता दें कि, 2 महीने पहले ही सरकार ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था. हाल ही में सड़क धंसने जैसी खबरें सामने आने के बाद लोगों के मन में यह बड़ा सवाल है कि अगर इस तरह की किसी लापरवाही या हादसे में कोई नुकसान होता है. तो मुआवजे का क्या नियम है. NHAI और सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक ऐसे हादसों में पीड़ित या उनके परिवार वाले भारी-भरकम मुआवजे के हकदार होते हैं बशर्ते उन्हें सही कानूनी प्रक्रिया पता हो. तो चलिए जानतें हैं आप इस मुआवजा कैसे क्लेम कर सकते हैं.
बता दें कि, अगर एक्सप्रेसवे पर अपनी गाड़ी से सफर कर रहे हैं अचानक से सड़क धंसने या खराब कंस्ट्रक्शन की वजह से कोई गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होती है. तो आप सिर्फ अपने व्हीकल इंश्योरेंस पर निर्भर नहीं रहते हैं. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण NHAI और संबंधित कंस्ट्रक्शन कंपनी की यह कानूनी जिम्मेदारी होती है कि वे रोड को सुरक्षित रखें. इसलिए इस तरह के सड़क हादसों को रोड अथॉरिटी की लापरवाही माना जाता है. आप मोटर व्हीकल ट्रिब्यूनल में जाकर NHAI के खिलाफ केस फाइल कर सकते हैं और कोर्ट लापरवाही के आधार पर मुआवजा तय करता है. जिससे आप को इस एक्सीडेंट से हुए नुकसान की भरपाई हो सके.
जानकारी के लिए बता दें हादसे के बाद मुआवजा पाने की कानूनी प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए आपके पास सही डॉक्यूमेंट्स होने बेहद जरूरी हैं. एक्सीडेंट के बाद आप सबसे पहले नजदीकी पुलिस स्टेशन में हादसे की FIR दर्ज कराएं. जिसमें सड़क धंसने या खराब रोड कंस्ट्रक्शन की बात लिखी हो. इसके अलावा, दुर्घटना स्थल की तस्वीरें या वीडियो, गाड़ी को हुए नुकसान का एस्टीमेट, मेडिकल बिल, डिस्चार्ज समरी और घायल या मृतक का आय प्रमाण पत्र संभालकर रखें. ये सभी डॉक्यूमेंट्स ट्रिब्यूनल में मुआवजा पाने में आपकी मदद करेगा.
अगर एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने के बाद अचानक ब्रेक लगाने पर पीछे से किसी गाड़ी ने टक्कर मार दी और भाग गया. तो इसे हिट एंड रन मामला माना जाएगा. सरकार की नई सॉलिडैरियम स्कीम के तहत हिट एंड रन मामलों में गंभीर रूप से घायल होने पर 50,000 हजार और मौत होने की स्थिति में 2 लाख रुपये तक का मुआवजा सरकार की तरफ से तुरंत दिया जाता है. इसके लिए आपको जिला मजिस्ट्रेट या क्लेम कमिश्नर के पास आवेदन करना होता है.








