उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में सरकार अब तकनीकी सुरक्षा को और मजबूत करने जा रही है। गृह विभाग यूसीसी पोर्टल में ऐसा उन्नत सत्यापन तंत्र विकसित कर रहा है, जिसके तहत पंजीकरण के लिए अपलोड किए जाने वाले दस्तावेजों की जांच कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित डीपफेक जैसी एआइ पहचान तकनीक से की जाएगी। इसका उद्देश्य फर्जी या छेड़छाड़ किए गए दस्तावेजों की शुरुआती स्तर पर ही पहचान कर उन्हें पंजीकरण प्रक्रिया से बाहर करना है। प्रदेश में यूसीसी लागू हुए डेढ़ वर्ष का समय हो गया है। यूसीसी पोर्टल पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव इन के आनलाइन पंजीकरण किए जा रहे हैं।
इसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। ऐसे में दस्तावेजों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। यह देखा गया कि कई बार व्यक्ति इसमें फर्जी दस्तावेज को अपलोड करते हुए पंजीकरण करने का प्रयास कर रहे हैं। इसी को देखते हुए पोर्टल में नई तकनीक को शामिल किया जा रहा है, जिससे अपलोड किए गए दस्तावेजों का स्वत: विश्लेषण होगा और उनमें किसी प्रकार की डिजिटल छेड़छाड़, फर्जीवाड़े या बदलाव के संकेत मिलने पर प्रणाली तुरंत उसे चिह्नित कर देगी। यदि जांच के दौरान कोई दस्तावेज संदिग्ध या फर्जी पाया जाता है तो संबंधित आवेदन स्वत: अगले चरण में नहीं बढ़ सकेगा। आवेदक को आवश्यक सुधार या वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी करने का अवसर मिलेगा।
इससे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण कराने के प्रयासों पर प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद है। यह व्यवस्था यूसीसी पोर्टल की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को और सुदृढ़ करेगी। सचिव गृह शैलेश बगौली का कहना है कि यूसीसी पोर्टल को लगातार सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।








