उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की ओर से तैयार किए गए धार्मिक शिक्षा पाठ्यक्रम को ही स्कूल मदरसे अपने यहां पढ़ाएंगे। इन स्कूल मदरसों में किसी भी छात्र को धार्मिक पाठ्यक्रम को जबरन पढ़ाने की अनुमति नहीं होगी। धार्मिक शिक्षा पाठ्यक्रम को स्कूल कार्यदिवस के आठ वादन से पहले या छुट्टी के बाद पढ़ाने की व्यवस्था दी गई है। शिक्षा प्राधिकरण की टीम समय-समय पर इनका भौतिक निरीक्षण भी करेगी साथ ही स्कूल मदरसों में धार्मिक शिक्षा संबंधित तय नियमों के नोटिस भी चस्पा करने हाेंगे।
धार्मिक शिक्षा के लिए करना होगा अलग पंजीकरण
प्राधिकरण के अध्यक्ष के अनुसार मदरसे स्कूलों को धार्मिक शिक्षा के लिए अलग पंजीकरण करना होगा। आठवीं तक संचालित संस्थानाें को पांच हजार रुपये और 12वीं तक के संस्थानों को साढ़े सात हजार रूपये शुल्क लिया जाएगा। अभी तक प्राधिकरण को धार्मिक शिक्षा प्रारंभ करने के 20 आवेदन मिले हैं। विषयवार शिक्षकों की व्यवस्था विभाग सुनिश्चित करेगा स्कूल मदरसों में गणित, विज्ञान, कंप्यूटर जैसे विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने की व्यवस्था शिक्षा विभाग देखेगा। शिक्षा विभाग उन्हीं मदरसे स्कूलों को मान्यता देगा जो विभाग के 20 मानकों को पूरा करेगा। जिसमें विषयवार शिक्षक, कक्षा-कक्ष, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल मैदान, पीएम पोषण योजना आदि से आच्छांदित हो।
धार्मिक शिक्षा पाठ्यक्रम विशेषज्ञों के सहयोग से तैयार : डा.गांधी
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डा. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि बुधवार से मदरसे नहीं, बल्कि संबंधित मदरसे के नाम के साथ जूनियर हाईस्कूल या इंटर मीडियट स्कूल शब्द जुड़ेगा। प्राधिकरण ने धार्मिक शिक्षा पाठ्यक्रम बनाते समय विशेष विशेषज्ञों की मदद ली और जब पाठ्यक्रम तैयार हो गया, फिर धर्म गुरुओं, प्राधिकरण के सदस्यों के साथ विशेषज्ञों की बैठक में इसे अनुमोदित किया गया है। यह बुधवार से ही लागू कर दिया गया है।
प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं होगा : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का उद्घाटन करते हुए कहा कि शिक्षा के मंदिरों में गुणवत्ता शिक्षा, पारदर्शिता और कौशल विकास होगा धामी सरकार प्राथमिकता दे रही है।








