उत्तराखंड में अभी 8.32 लाख गायब चल रहे मतदाताओं पर मतदाता सूची से नाम काटे जाने का खतरा मंडरा रहा है ऐसे में अब मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय एक बार फिर इनसे संपर्क साधने का प्रयास कर रहा है। इसमें विफल होने की स्थिति में इनके नाम मतदाता सूची से काट दिए जाएंगे। यह संख्या कुल मतदाताओं के हिसाब से 10.46 प्रतिशत है। प्रदेश में इस समय एसआइआर का कार्य अपने अंतिम चरणों की ओर है। सात जुलाई को एसआइआर के तहत फार्म वापस लेकर डिजिटाइजेशन करने का कार्य समाप्त हो जाएगा। अभी तक आयोग पंजीकृत 79,60,530 मतदाताओं तक फार्म पहुंचा चुका है। यानी मतदाता सूची में दर्ज सभी नामों के फार्म छाप कर उनसे संपर्क करने का प्रयास किया जा चुका है।
इनमें से 7,083,915 मतदाताओं के फार्म डिजिटाइज्ड किए जा चुके हैं। यह कुल मतदाताओं का 88.99 प्रतिशत है। शेष पर अभी कार्य चल रहा है। इस दौरान यह बात सामने आई है कि 8,32,834 मतदाता ऐसे हैं, जो अपने पते पर नहीं पाए गए, अथवा जिनके फार्म तो बंटे वह वापस नहीं किए गए। इन्हें लेकर अब मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि इनसे संपर्क किया जाए और इनके फार्म वापस लेने के प्रयास किए जाएं। इसके बाद भी जो फार्म वापस नहीं मिलेंगे, उनके नाम काट दिए जाएंगे। सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तूदास ने कहा कि ऐसे सभी मतदाताओं से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है।
जिलेवार फार्म वापस न मिलने वालों की संख्या
- अल्मोडा- 56,415
- बागेश्वर – 13,186
- चंपावत – 17,936
- पिथौरागढ़ – 27,764
- पौड़ी गढ़वाल – 54,195
- टिहरी गढ़वाल – 44,254
- चमोली – 23,616
- नैनीताल – 72,245
- यूएस नगर – 1,86,666
- उत्तरकाशी – 18,386
- रुद्रप्रयाग – 10,695
- देहरादून – 1,86,182
- हरिद्वार – 1,21,284
कुल – 8,32,834








